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बेरोज़गारी

काम चाही साहेब
बेकार बानी हम
बहुते मजबूर बानी
लाचार बानी हम…
(१)
एको बेरा के अब
खर्ची नइखे घर में
सेठ-साहूकार के
कर्जेदार बानी हम…
(२)
अब कांहा से कराईं
आख़िर आपन दवाई
पिछला चार दिन से
बीमार बानी हम…
(३)
पढ़ले-लिखले बानी
कामो सिखले बानी
तबो ये धरती पर
एगो भार बानी हम..
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#राजनीतिककविता #बहुजनशायर
#चुनावीशायरी #जनवादीगीतकार
#रोजगार #JOBDO

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Lyricist, Journalist, Social Activist

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