· Reading time: 1 minute

बाल विवाह

विधा-मुक्तक

अबहिन बेटी एतने जाने,पढ़ल-लिखल खेलल-खाइल।
देखि झंँवाइल ई का होता,जब डोली दुवरे आइल।
रहे बाप-माई के चिन्ता,जाँह पबित्तर हो जाओ,
बेटी हो तूँ बर के भइलू ,हाथ-बाँहि अब पकड़ाइल।

**माया शर्मा, पंचदेवरी, गोपालगंज (बिहार)**

40 Views
Like
Author

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...