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बदबू से रोवेला गेंदा-गुलाब

बदबू से रोवेला गेंदा-गुलाब
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होत सबेर चाहे होखे अबेरा
सड़की प बदबू के बाटे बसेरा
लोगवा के आदत बा अइसन खराब
बदबू से रोवेला गेंदा-गुलाब
खाली जगहि तबो सड़के पर जाके
बीचे से दुइ डेग पीछे हटा के
डोल-डाल करे के बा भइल रिवाज
कि भोगता देखीं ना सउंसे समाज
टिप-टाप क के आ जातरा बना के
खुश्बू के साबुन से खूब नहा के
आ नया लिबासो पर सेन्ट गिरा के
असली निखार आवे सड़क प जा के
सर्दी-जुकाम चाहे दामा खाँसी
सड़क प सेहत के लागत बा फाँसी
कवनो काम सभे सड़के से जाला
चाहे ना धूरा से तबो नहाला
सबेरे के अच्छा हवा के खाइल
हवा में देखीं ना ज़हर घोराइल
ज़हर से बहुत के जिनिगी ओराइल
दिमागी बोखार येही से आइल
लइकन के आवता उल्टी आ दस्त
माई-बाप रोवें बैदा बा मस्त
देत सरकार हवे सबके आवास
दित रुपया के राशि हजारे पचास
टायलेट के भाई करित आदेश
कि तनिको त सुधरित गँऊँवा के भेष
नइखे टायलेट उ पइसा जुटाइत
सड़की प नाहीं सरेहे में जाइत
त चलत में केतना राहत बुझाइत
सड़क प नाक नाहीं केहू दबाइत

– आकाश महेशपुरी

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Author
संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…

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