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पछतइबू तू

देख लीहअ अपना ये करनी पर
सगरी उमिर पछतईबू तू
सुनके सखियन से चर्चा हमार
हाथ मलके रह जईबू तू
( 1)
हम प्यार के पागलपन में
अपना खून से लिखनी जेके
आज कड़वा लगेला तहके जवन
उहे गीत दोहरईबू तू
(2)
मन होखे चाहे ना बाकिर
दोसरा के दिखावे खातिर
अपना आंखिया में लोरवा भर के
रात-दिन मुस्कुरईबू तू
(३)
अभीन केतना काम बा करेके
फूर्सत नईखे हमरा मरेके
केतना मिलिहें चंदा हमके
दोसर शेखर ना पईबू तू

#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra

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Lyricist, Journalist, Social Activist

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