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देशभक्ति मुक्तक

मुक्तक
आधार छंद- सार

खून गरम हऽ हिंदुस्तानी, समझ न लीहऽ पानी।
यारन खातिर यार, शत्रु ला, दुश्मन बड़का मानी।
पाक चीन से पूछ सकेनी, घाव दिहल हमनी के-
रण में जब-जब भेंट भइल हऽ, याद आइलि हऽ नानी।

सरहद के रखवाली कऽरत, जे भी जान गँवावल।
चुमि के फंदा फांसी वाला, जय हिन्द गोहरावल।
मातृभूमि पर शीश चढा़ के, अमर शहीद कहइलन-
अँखियन में आजादी वाला, जे भी ख्वाब सजावल।

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य
तुर्कपट्टी, देवरिया, (उ.प्र.)
☎️7379598464

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