· Reading time: 1 minute

दीया

सुमुखी सवैया–

घमण्ड रहे न अमावस के जब दीपक में उजियार रहे।
जरे घर भीतर बाहर लौ हर झोंक बदे तइयार रहे।
लड़े भर राति हरे तम के हर मारग के सँइहार रहे।
खुदे जरि बाँटि अँजोर इहाँ बतलावत ज्ञान क सार रहे।।

**माया शर्मा, पंचदेवरी, गोपालगंज (बिहार)**

20 Views
Like
Author

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...