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दहेज

भगावलि जाति हऽ बेटी।
मुआवलि जाति हऽ बेटी।
दहेजे की चिता पर अब-
जरावलि जाति हऽ बेटी।

कहीं आज बेटी जरावलि गइलि।
कहीं दे के माहुर मुवावलि गइलि।
दहेजे क दानव बड़ी क्रूर बा-
दिहल जात ताना भगावलि गइलि।

सन्तोष कुमार विश्वकर्मा सूर्य

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