· Reading time: 1 minute

दलीदर

दलीदर
~~~~~

दीपावली के होते भोर
कि लागेला अइले सन चोर
सुतले-सुतले कर दे बारे
जागेला ऊहो भिनुसारे
सूपा लेके फट फट फट फट
बकरी जइसे पट पट पट पट
खटर पटर खट खट खट घर घर
लोगवा खेदे खूब दलीदर
घोठा घारी चउकी चारा
घर दुवार अउरी ओसारा
चुल्ही तर आँगन पिछुवारे
लोगवा खूब दलीदर मारे
सूपा के सुनि के फटकारा
पगहा तूरे भागे पाड़ा
भागे बिल्ली बड़ी डेरा के
चूहा बीयल में घबरा के
सहमें चिरई कउवा तीतर
बाकिर नाहीं हटे दलीदर
बैर भाव त जाते नइखे
मनवा कबो नहाते नइखे
पसरल बाटे कइ कइ मीटर
झाकीं ना मनवा के भीतर
मनवा के पाँको आ काई
सूपा से कइसे फटकाई
राखीं पानी आ सच्चाई
सदगुण के साबुन से भाई
मनवा के पहिले झटकारीं
मन में उहे दलीदर मारीं
काम करीं खूबे सुरिया के
धन दौलत आई धरिया के

– आकाश महेशपुरी

3 Likes · 4 Comments · 284 Views
Like
Author
संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...