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तोहर गाँव कहाँ बा (कविता)भिखारी ठाकुर

गाँव गाँव शहर शहर
तू घुर रहल बाड़ऽ
माटी के माथ पर
लेप चानर जइसे
तू चूम रहल बाड़ऽ
सुन सुन ए बटोही
तोहार गाँव कहाँ बा

फाटल छिटल
दूगो कुरता धोती
आख प चशमा
जन कल्याण के खातीर
झोला झंडा लेके
ठङा मे ठिठुर रहल बाड़ऽ
सुन सुन ए बटोही
तोहार गाँव कहाँ बा

जंगल-झार , वीरन मे
कुसुम फुल के देखिके
गीत गजब के कढ़इलऽ
संस्कृति विस्तार के खातीर
जेठ बैशाख के घाम मे कुद रहल बाड़ऽ
सुन सुन ए बटोही
तोहार गाँव कहाँ बा

मूल रचनाकार- (मौलिक एवं स्वरचित)
© श्रीहर्ष आचार्य(मैथिली)
अनुवाद- सोनू कुमार यादव ( सारण)
भोजपुरी

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Author
विधा नन्द सिंह उपाख्य : श्रीहर्ष आचार्य शिक्षा : एम.एस-सी., एम.बी.ए. जन्म तिथि-1996 मैथिली, हिन्दी,संस्कृत ,खोरठा,अंग्रेजी,अवधी,बंगाली ब्रजभाषा,भोजपुरी,मगही में गजल, दोहा, गीत,कविता ,उपन्यास लेखन सम्मान/पुरस्कार : सरस्वती साहित्य सम्मान, ब्रजभाषा गौरव…

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