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जियरवा में भरल नेहिया, कहऽ कइसे दिखाई हम।

जियरवा में भरल नेहिया, कहऽ कइसे दिखाई हम।
बनल बाड़ऽ तू पाथर के, कहऽ कइसे सुनाई हम।

ना जाने लऽ ना माने लऽ, इश्क़ ई चीज का होला,
ई नेहिया नाम मिटला के कहऽ कइसे बताई हम।

भरम तनिका न हमरा बा, सजन तोहरे के मानिला,
भरम मे़ डाल तू दिहल, कहऽ कइसे मिटाई हम।

वफ़ा कइनी सुन सजना, वफ़ा तोहसे न हम पइनी,
ई बतिया बेवफ़ाई के, कहऽ कइसे भुलाई हम।

नज़र भर जो सचिन देखऽ, त हियरा ई जुड़ा जाई।
रहेल दूर अखियां से, कहऽ कइसे जुड़ाई हम।

✍️पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’

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Author
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…

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