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जिनिगी के नइया डूबल जाले लोरवा में

जिनिगी के नइया डूबल जाले लोरवा में
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जिनिगी के नइया डूबल जाले लोरवा में
लोरवा के नइखे ओर छोर रे खेवइया

सपना बीखरि गइलें अगीया में जरि गइलें
किस्मत फाटल जइसे फाटे रे बेवइया

सबका के जिनिगी भर बहुते सतवनी हम
दुख भइल हमरा के होई रे सहइया

अब पछतइला से कुछउ त मीली नाहीं
आई नाहीं फेरू जवन बीतल रे समइया

बिहने ये दुनिया से जाये के लिखल बाटे
काम नाहीँ करी बैदा तोर रे दवइया

छुटि जाई खेत बारी छुटि जइहें पूत नारी
उड़ि जइहें सब पारा पारी रे चिरइया

– आकाश महेशपुरी

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संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…

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