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जागत रहिअ हो

जागत रहिअ भइया
जागत रहिअ हो
आज के रतिया भारी
जागत रहिअ हो…
(१)
सामने आवे क़ातिल
या कवनो लूटेरा
तू हक़ खातिर अपना
लड़त रहिअ हो…
(२)
चारू ओर अन्हरिया
सूझे ना डगरिया
दीया नियन तिल-तिल
जलत रहिअ हो…
(३)
खुलो शायद एइसे
नींदिया केहू के
तू क्रांति के गीतिया
टेरत रहिअ हो…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#राजनीतिककविता #चुनावीशायरी

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Lyricist, Journalist, Social Activist

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