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जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला(भोजपुरी)

जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला
लोर बहैला आखि से मागिया सजे करैज तरसैला
जिनगी सभालि कैसे फुनुगी हमार से लप्पकैला
घनि बँसवरिया मिली कैसे आई लोगन मन ठनकैला
जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला

प्यार काहे पाप होला दिने दिने देहिया भखरैला
बाबू माई के चक्कर मे तेजि माहुर खाय कल कहकैला
चिरई चुगलपन करैला छिप्पे पर,नाग देख हमरा डरैला
प्यार पागलपन काहे होला,जहान से भटकैला
जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला

आँखि में लोर,मन में पीरा बा पोसल खुन लहरैला
जिनिगी से जूझत बानी,मौत नाहि काहे आबैला
झंखत बानी फाटल करैज रैल जैसे धक धक धडकैला
गलती कयनि अपने से,फासि जेसै सजा भी पाईला
जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला

मौलिक एवं स्वरचित
© श्रीहर्ष आचार्य

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Author
विधा नन्द सिंह उपाख्य : श्रीहर्ष आचार्य शिक्षा : एम.एस-सी., एम.बी.ए. जन्म तिथि-1996 मैथिली, हिन्दी,संस्कृत ,खोरठा,अंग्रेजी,अवधी,बंगाली ब्रजभाषा,मगही में गजल, दोहा, गीत,कविता ,उपन्यास लेखन सम्मान/पुरस्कार : सरस्वती साहित्य सम्मान, ब्रजभाषा गौरव…

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