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जइसे चाँद निकले

सज के आवे जइसे
सज जाला खेत सरसो फूल से,
हमर दिल तनी जोर से
धड़क जाला हो,
जइसे चाँद निकले बदरी के कोर से,
घूंघट सरके त ओकर
चेहरा नजर आला हो,
****
दूर बजे जैसे बंसी मग्न नेह में
गुण- गुणावे त सुर ओसही लग जाला हो,
जइसे भोरे झड़े बून्द ओस के दुभ से,
ओकर बतिया से स्नेह ओसही झड़ जाला हो।
जइसे चाँद निकले……
****

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हम लेखक तो मनमौजी हैं पर फूल और अंगार दोनों लिखने की कुव्वत रखते हैं।

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