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गजल

प्रीति के रीति सबके पता हो गइल
आजु अइसन भइल का खता हो गइल

साँस अचके फँसल नेह के डोर में
लाज लागल त साँचो वफ़ा हो गइल

डोर छूटल कलम हाथ से छू गइल
आजु लिखलस कलम ऊ दफा हो गइल

कैद से आज उनका मिलल मौसमी
देखि मौसम सुहानी खफा हो गइल

बाति सारा जगत के पता चल गइल
नाम से तोहरा जब नफा हो गइल

गणेश नाथ तिवारी”विनायक”

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