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कामना अब तऽ

खुशी से हर घड़ी होखत रहो, जी सामना अब तऽ।
कि आइल जिंदगी में गम जुदाई, बा मना अब तऽ।
मुहब्बत में कटे हर पल, कबो आवे न गम आंँसू-
रहीं खुशहाल जिनगी भर, इहे बा कामना अब तऽ।

#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’

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