· Reading time: 1 minute

ई कइसन मिलन बा (बिदाई गीत)

नजर में रहे ऊ नगर छूट जाता,
ई कइसन मिलन बा कि घर छूट जाता।

जहाँ डेग पहिला ई आपन उठवनी,
कि बाबू जी अँगुरी धरा के घुमवनी,
ऊ बारी बगइचा डगर छूट जाता-
ई कइसन मिलन बा कि घर छूट जाता।

सखी सब के टोली दिवाली आ होली,
कि भाई बहिन सँग हँसी आ ठिठोली,
बितावल गइल हर पहर छूट जाता-
ई कइसन मिलन बा कि घर छूट जाता।

जुडाइल करीं रोज हम जिंदगी में,
कि माई के ममता के जवने नदी में,
वो उफनत नदी के लहर छूट जाता-
ई कइसन मिलन बा कि घर छूट जाता।

इहे सोच के आज आवे रोवाई,
इ गँउवाँ नगर अब से हितई कहाई,
बसे जान ईहवें मगर छूट जाता-
ई कइसन मिलन बा कि घर छूट जाता।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 10/12/2021

27 Views
Like
Author
संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...