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आईं न तनि बैठीं

आईं न तनि बैठीं ,
कुछ बात कइल जा।
छोड़ि दंभ,क्लेश,द्वेष,
मुलाकात कइल जा।
आईं न तनि ………

उ समय रहल,
हम के छाया में।
हम भटक गइलीं,
मोह माया में।
परत अखियाँ पर के,
अब दूर कइल जा।
आईं न तनि……..

इंसा भागल बा अंदर से,
खोखर भइल बा काया।
मानव के देखि न पवलीं,
हरदम तन दानव पाया।
बनके निरामिष अब,
मूक जीव मन समझल जा।
आईं न तनि…………….

चमड़ी उज्जर गोरहर गाल,
अन्तर कोठर करिया।
छीनि हक दूसरे के,
पेट भइल बा हड़िया।
अब रोग व्याधि घेरले जाता,
चलीं कवनो उपाय कइल जा।
आईं न तनि………………..

भाव के भाव न समझलीं,
प्यार समझलीं खेल।
भव सागर में डूबत नैया,
अब लागत बानी जेल।
चलीं न एक प्रेम नैया,
अउर पतवार धइल जा।
आईं न तनि………….

**********************
अशोक शर्मा,कुशीनगर,उ.प्र.
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"सीखाने वाला एक शिक्षक और सीखने वाला एक विद्यार्थी।'' निवास: लाला छपरा, पत्रालय: लक्ष्मीगंज, जनपद: कुशीनगर,U.P. पिन 274306 M.A.(Eco), B. Ed., and other.. Mob..9838418787, 6392278218

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