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अदमी अउर सपवां

यदि सँपवा विष ना पावत,
यदि ओके डंसे ना आवत।
लोग पहिन के गटई में घुमते,
बेचारा माला बन जावत।

मनई से संपवा के ,ना नाता भवेला,
तब मनई विष, कहाँ से पावेला।
देखि देखि विष उगलत मनई के,
संपओं के मन घबरायेला।

सपवां हवे टेड़ा मेंढा,
घुसे बिल सीधा हो जाय।
पर कुछ मनई के चाल चलन,
हरदम जग में टेढ़ा रह जाय।

जब विषाक्त होवे सपवां,
छोड़े केचुलि बारम्बार।
पर विष निगलल देखि मनई के,
सपवां भागे अपरम्पार।

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"सीखाने वाला एक शिक्षक और सीखने वाला एक विद्यार्थी।'' निवास: लाला छपरा, पत्रालय: लक्ष्मीगंज, जनपद: कुशीनगर,U.P. पिन 274306 M.A.(Eco), B. Ed., and other.. Mob..9838418787, 6392278218

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