Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 12, 2017 · 1 min read

२१२२–२१२२–२१२२
ई है
कोशिशे नाकाम तो हरदम रही है
चल रहे हैं फिर भी यारो ज़िंदगी है

ज़िंदगी की फ़लसफे बिंदास हैं
दुख रहे या हो खुशी देखी नमी है

तुम नहीं पर सुन रही हैं आहटे सी
धड़कनो की कैसी ये दीवानगी है

चाहतो के दौर का मंज़र न पूछो
हर तरफ़ बस तू ही तू पर तू नहीं है

सोचते रहते हो क्या कुछ तो बताओ
ऐसी भी तो क्या हमारे में कमी है

चलते चलते रात भी चुप हो गई थी
सुन रहे जो पांव की पायल बजी है

दौर इक पीछे चले जब छोड़कर हम
ख्वाब आगे हैं अजब दीवानगी है

2 Likes · 156 Views
You may also like:
हम भूल तो नहीं सकते
Dr fauzia Naseem shad
बिटिया होती है कोहिनूर
Anamika Singh
पिता
Shankar J aanjna
अनामिका के विचार
Anamika Singh
आदर्श पिता
Sahil
मिठाई मेहमानों को मुबारक।
Buddha Prakash
नदी की अभिलाषा / (गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सत्यमंथन
मनोज कर्ण
कैसे मैं याद करूं
Anamika Singh
तू तो नहीं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
रहे इहाँ जब छोटकी रेल
आकाश महेशपुरी
मजदूरों का जीवन।
Anamika Singh
मातृ रूप
श्री रमण 'श्रीपद्'
बे'बसी हमको चुप करा बैठी
Dr fauzia Naseem shad
शहीदों का यशगान
शेख़ जाफ़र खान
इश्क
Anamika Singh
ऐ मातृभूमि ! तुम्हें शत-शत नमन
Anamika Singh
बँटवारे का दर्द
मनोज कर्ण
याद तेरी फिर आई है
Anamika Singh
आंसूओं की नमी
Dr fauzia Naseem shad
दिल में बस जाओ तुम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
हम तुमसे जब मिल नहीं पाते
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
रोटी संग मरते देखा
शेख़ जाफ़र खान
हो मन में लगन
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
गीत- जान तिरंगा है
आकाश महेशपुरी
बदलते हुए लोग
kausikigupta315
पिता का सपना
श्री रमण 'श्रीपद्'
मुँह इंदियारे जागे दद्दा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बेरोज़गारों का कब आएगा वसंत
Anamika Singh
रबीन्द्रनाथ टैगोर पर तीन मुक्तक
Anamika Singh
Loading...