Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
May 28, 2021 · 1 min read

3.-गलतफहमी की बरसात

कोरे कागज से जीवन पर
उतारा मैंने सुखद एहसास,
लिखा था स्नेह की स्याही से
सजाया नेह की लिखाई से
महकाया वात्सल्य की इत्र से
निहारा था मैंने अनुभूति भाव से
कितना खास था वो स्नेहिल एहसास
पर अति की अधिकाई से
पहुंचा मेरे एहसास को नुक़सान
उमड़ पड़ी जब गलतफहमी की बरसात
भीग गया एहसास भरा जीवन कागज
गल गया स्नेह का हर शब्द
मिट सा गया नेह भरा हर लफ्ज
उड़ गई सुगंध वात्सल्य इत्र की
अभाव में हो गई अनुभूति भी खाक।

– सीमा गुप्ता, अलवर राजस्थान

4 Likes · 10 Comments · 210 Views
You may also like:
पवित्र
rkchaudhary2012
बादल को पाती लिखी
अटल मुरादाबादी, ओज व व्यंग कवि
अल्फाज़ ए ताज भाग-2
Taj Mohammad
“ मिलकर सबके साथ चलो “
DrLakshman Jha Parimal
प्रात का निर्मल पहर है
मनोज कर्ण
संघर्ष
Arjun Chauhan
सद्आत्मा शिवाला
Pt. Brajesh Kumar Nayak
గురువు
Vijaykumar Gundal
✍️महज़ बातें ✍️
Vaishnavi Gupta
कबीर के राम
Shekhar Chandra Mitra
नागफनी बो रहे लोग
शेख़ जाफ़र खान
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
इन्तिजार तुम करना।
Taj Mohammad
कल भी होंगे हम तो अकेले
gurudeenverma198
✍️जन्नतो की तालिब है..!✍️
'अशांत' शेखर
बताओ मुझे
Anamika Singh
“ मेरे राम ”
DESH RAJ
वही मित्र है
Kavita Chouhan
जीवन मेला
DESH RAJ
चांद
Annu Gurjar
दुखो की नैया
AMRESH KUMAR VERMA
कुछ हंसी पल खुशी के।
Taj Mohammad
यशोधरा की व्यथा....
kalyanitiwari19978
- साहित्य मेरी जान -
bharat gehlot
अक्षय तृतीया
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
कहां मालूम था इसको।
Taj Mohammad
अमर कोंच-इतिहास
Pt. Brajesh Kumar Nayak
*हर घर तिरंगा (गीतिका)*
Ravi Prakash
ऐ बादल अब तो बरस जाओ ना
नूरफातिमा खातून नूरी
अपने दिल को।
Taj Mohammad
Loading...