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Oct 11, 2021 · 1 min read

साहित्यक दलाल स लड़ब हम,

साहित्यक दलाल स लड़ब हम,
धर्मक ठिकेदार के देबै हम खिहाइर?

लोकचेतना अनबै,यथार्थक संग रहबै फांर बान्हि ठाढ़?
जनसरोकार बढ़ौ, कारीगर लिखत बिद्रोहक भाषा.

शायर- किशन कारीगर
(©काॅपीराईट)

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