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लतखिंचुअन के पँजरी…

लतखिंचुअन के पँजरी…
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लतखिंचुअन के पँजरी कबहूँ तू जइहऽ मति
मति मार दिहे सँ येकनी से बतिअइहऽ मति

बस लात पकड़ के खींचे के तइयारी बा
गाँव-नगर में पसरल ईहे बेमारी बा
मंजिल देखिहऽ तू बाती में अझुरइहऽ मति-
मति मार दिहे सँ येकनी से बतिअइहऽ मति

दोसरा के आगे बढ़त देखि दुख पावेला
दुख देबे खातिर पीछे पीछे धावेला
अइसन मनई के लासा में लसिअइहऽ मति-
मति मार दिहे सँ येकनी से बतिअइहऽ मति

काम करे जे मनवा के साहस तूरे के
ऊ नीक हवे ना मीत लगे भा दूरे के
अइसन लोग के माथे कबो चढ़ऽइहऽ मति-
मति मार दिहे सँ येकनी से बतिअइहऽ मति

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 02/04/2021

2 Likes · 1 Comment · 204 Views
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