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देशभक्ति सोहर

देशवा ई सोना के चिरइया त, हीरा उगवइया नू हो।
ए ललना
दुश्मन विदेसी लुटवइया त, माटी मिलवइया नू हो।

तड़पत कुहुकत धरती त, लोरिया बहावसूँ हो,
ए ललना
कइलस गुलाम दुशमनवा त, बृतीस कसइया नू हो।

माई के देखलन दरदिया त, बेटा नाहीं रही पवलन हो,
ए ललना,
गांधी आजाद, सुभाष चन्द्र, भगत सिंह सिपहिया नू हो।

हँसत हँसत फांसी चढि गइलन, कई जाना जेहल गइलन हो,
ए ललना,
तब जा के आइल शुभ दिनवा त, मिलल अजदिया नू हो।

पन्द्रह अगस्त शुभ दिनवा त, देसवा आजाद भइलन हो,
ए ललना,
वीरन के कुर्वानी मत भुलइहऽ त,, झंडा फहरइहऽ नू हो।

#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य

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