Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Nov 2022 · 1 min read

*जिधर देखो उधर कुत्ते (हिंदी गजल/गीतिका)*

जिधर देखो उधर कुत्ते (हिंदी गजल/गीतिका)
_________________________
1
इधर कुत्ते उधर कुत्ते ,जिधर देखो उधर कुत्ते
सड़क पर और गलियों में, डराते हैं निडर कुत्ते
2
अकेला व्यक्ति गलियों में, घुसने से है घबराता
भ्रमण करते हैं मस्ती से, गलियों में अगर कुत्ते
3
जो मिल जाऍं गली के मोड़ पर तो कॉंपता है तन
बड़ी खूॅंखार रखते हैं, कई अपनी नजर कुत्ते
4
दाऍं को जो कुत्ता है, चलो बाईं तरफ प्यारे
अगर हैं कटखने तो, भागते हैं काटकर कुत्ते
5
लावारिस जो कुत्ते हैं, सुनिश्चित जानलेवा हैं
करे सरकार निर्भय देश, सब जेलों में धर कुत्ते
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा,रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

127 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
*परवरिश की उड़ान* ( 25 of 25 )
*परवरिश की उड़ान* ( 25 of 25 )
Kshma Urmila
राजनीति की नई चौधराहट में घोसी में सभी सिर्फ़ पिछड़ों की बात
राजनीति की नई चौधराहट में घोसी में सभी सिर्फ़ पिछड़ों की बात
Anand Kumar
पनघट और पगडंडी
पनघट और पगडंडी
Punam Pande
ईमानदारी की ज़मीन चांद है!
ईमानदारी की ज़मीन चांद है!
Dr MusafiR BaithA
फ़साने
फ़साने
अखिलेश 'अखिल'
**विकास**
**विकास**
Awadhesh Kumar Singh
बॉलीवुड का क्रैज़ी कमबैक रहा है यह साल - आलेख
बॉलीवुड का क्रैज़ी कमबैक रहा है यह साल - आलेख
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
#देसी_ग़ज़ल
#देसी_ग़ज़ल
*Author प्रणय प्रभात*
एक फूल
एक फूल
Anil "Aadarsh"
रिश्ते
रिश्ते
Ram Krishan Rastogi
* मुस्कुरा देना *
* मुस्कुरा देना *
surenderpal vaidya
अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम
अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम
Pt. Brajesh Kumar Nayak
हे प्रभु !
हे प्रभु !
Shubham Pandey (S P)
होली की आयी बहार।
होली की आयी बहार।
Anil Mishra Prahari
दिल तोड़ने की बाते करने करने वाले ही होते है लोग
दिल तोड़ने की बाते करने करने वाले ही होते है लोग
shabina. Naaz
मेरे अल्फाज़
मेरे अल्फाज़
Dr fauzia Naseem shad
कर
कर
Neelam Sharma
वीर-जवान
वीर-जवान
लक्ष्मी सिंह
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet kumar Shukla
आखिर उन पुरुष का,दर्द कौन समझेगा
आखिर उन पुरुष का,दर्द कौन समझेगा
पूर्वार्थ
मूर्दों का देश
मूर्दों का देश
Shekhar Chandra Mitra
जज़्बात-ए-दिल
जज़्बात-ए-दिल
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
*हम पर अत्याचार क्यों?*
*हम पर अत्याचार क्यों?*
Dushyant Kumar
... और मैं भाग गया
... और मैं भाग गया
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
युद्ध के मायने
युद्ध के मायने
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-158के चयनित दोहे
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-158के चयनित दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
स्वस्थ तन
स्वस्थ तन
Sandeep Pande
हिन्दीग़ज़ल में कितनी ग़ज़ल? -रमेशराज
हिन्दीग़ज़ल में कितनी ग़ज़ल? -रमेशराज
कवि रमेशराज
*सैनिक 【कुंडलिया】*
*सैनिक 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
!! ईश्वर का धन्यवाद करो !!
!! ईश्वर का धन्यवाद करो !!
Akash Yadav
Loading...