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जनवादी रंग

कटाक्ष होखे के चाहीं
व्यंग होखे के चाहीं!
गोरख औरी अदम के
ढ़ंग होखे के चाहीं!!
रीतिवाद या छायावाद
कवना काम के बा!
कविता में जनवादी
रंग होखे के चाहीं!!
Shekhar Chandra Mitra
#जनवादीगीतकार

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