Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings

चल कबीरा

चल कबीरा
ओही देश
चल फकीरा
ओही देश…
जाहां ना
कवनो भय
जाहां ना
कवनो क्लेश…
ऊंच-नीच
इहां राह
डेगे-डेगे
लागे ठेस…
घूमेलें इहां
बटमार
धरके
जोगी के भेस…
ऊ नील
गगन के हंसा
का देला
समझ संदेश…
तोड़ के
सगरी मोह
छोड़ के
अब परदेश…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#Nirgun
#OshoVosion

375 Views
You may also like:
जीवन की दुर्दशा
Dr fauzia Naseem shad
उफ ! ये गर्मी, हाय ! गर्मी / (गर्मी का...
ईश्वर दयाल गोस्वामी
काश मेरा बचपन फिर आता
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
हमनें ख़्वाबों को देखना छोड़ा
Dr fauzia Naseem shad
श्री राम स्तुति
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
खुद को तुम पहचानों नारी ( भाग १)
Anamika Singh
सही-ग़लत का
Dr fauzia Naseem shad
हायकु मुक्तक-पिता
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
ख़्वाब पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
पिता के चरणों को नमन ।
Buddha Prakash
आई राखी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बुद्ध धाम
Buddha Prakash
इंतज़ार थमा
Dr fauzia Naseem shad
#पूज्य पिता जी
आर.एस. 'प्रीतम'
मेरी भोली ''माँ''
पाण्डेय चिदानन्द
अब आ भी जाओ पापाजी
संदीप सागर (चिराग)
प्रकृति के चंचल नयन
मनोज कर्ण
बेरूखी
Anamika Singh
【6】** माँ **
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
गिरधर तुम आओ
शेख़ जाफ़र खान
पिता तुम हमारे
Dr. Pratibha Mahi
दिल में बस जाओ तुम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
उलझनें_जिन्दगी की
मनोज कर्ण
जीवन-रथ के सारथि_पिता
मनोज कर्ण
श्रम पिता का समाया
शेख़ जाफ़र खान
'फूल और व्यक्ति'
Vishnu Prasad 'panchotiya'
आपको याद भी तो करते हैं
Dr fauzia Naseem shad
गाऊँ तेरी महिमा का गान (हरिशयन एकादशी विशेष)
श्री रमण 'श्रीपद्'
" मैं हूँ ममता "
मनोज कर्ण
झूला सजा दो
Buddha Prakash
Loading...