Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

इंकलाब के गीत

आवे के पड़ी
भगतसिंह
आवे के पड़ी
एक बार
औरी तहके
आवे के पड़ी…
लिखले बानी
हम अपना
ख़ून से जवन
ऊ गीतिया
इंकलाब के
गावे के पड़ी…

182 Views
You may also like:
पिता का आशीष
Prabhudayal Raniwal
पिता
नवीन जोशी 'नवल'
रुक-रुक बरस रहे मतवारे / (सावन गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बुन रही सपने रसीले / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कुछ पल का है तमाशा
Dr fauzia Naseem shad
ग़ज़ल- मज़दूर
आकाश महेशपुरी
अपना ख़्याल
Dr fauzia Naseem shad
पिता जी का आशीर्वाद है !
Kuldeep mishra (KD)
प्यार में तुम्हें ईश्वर बना लूँ, वह मैं नहीं हूँ
Anamika Singh
क्यों हो गए हम बड़े
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
द माउंट मैन: दशरथ मांझी
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
समय ।
Kanchan sarda Malu
हवा का हुक़्म / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
जुद़ा किनारे हो गये
शेख़ जाफ़र खान
बहुमत
मनोज कर्ण
यादें वो बचपन के
Khushboo Khatoon
मेरे पिता है प्यारे पिता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
कभी वक़्त ने गुमराह किया,
Vaishnavi Gupta
✍️फिर बच्चे बन जाते ✍️
Vaishnavi Gupta
दो जून की रोटी उसे मयस्सर
श्री रमण 'श्रीपद्'
बूँद-बूँद को तरसा गाँव
ईश्वर दयाल गोस्वामी
हे पिता,करूँ मैं तेरा वंदन
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
रावण - विभीषण संवाद (मेरी कल्पना)
Anamika Singh
चराग़ों को जलाने से
Shivkumar Bilagrami
पैसा बना दे मुझको
Shivkumar Bilagrami
जिंदगी
Abhishek Pandey Abhi
कोई मरहम
Dr fauzia Naseem shad
पिता की नसीहत
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बहुआयामी वात्सल्य दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
✍️कोई तो वजह दो ✍️
Vaishnavi Gupta
Loading...