Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

ख़ून के एक बूंद

रह गईल बाटे
बहुत कम वक़्त!
अब्बो सम्भल जो
रे कमबख्त!!
(१)
मजलूम जनता
अब जागअ तिया!
उलट जाई ताज
पलट जाई तख्त!!
(२)
जेतने संगीन
गुनाह तें कईले
सज़ा मिली तोके
ओतने सख़्त!!
(३)
इंकलाब आख़िर
होके रही
बेकार ना जाई
एक बूंद रक्त!!
#farmersprotestchallenge
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra

216 Views
You may also like:
थोड़ी सी कसक
Dr fauzia Naseem shad
संविदा की नौकरी का दर्द
आकाश महेशपुरी
इसलिए याद भी नहीं करते
Dr fauzia Naseem shad
【6】** माँ **
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
चलो एक पत्थर हम भी उछालें..!
मनोज कर्ण
🥗फीका 💦 त्यौहार💥 (नाट्य रूपांतरण)
पाण्डेय चिदानन्द
✍️वो इंसा ही क्या ✍️
Vaishnavi Gupta
प्रेम का आँगन
मनोज कर्ण
क्या ज़रूरत थी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आसान नहीं होता है पिता बन पाना
Poetry By Satendra
✍️रास्ता मंज़िल का✍️
Vaishnavi Gupta
✍️फिर बच्चे बन जाते ✍️
Vaishnavi Gupta
*पापा … मेरे पापा …*
Neelam Chaudhary
गरीबी पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
छोड़ दी हमने वह आदते
Gouri tiwari
मुझे तुम भूल सकते हो
Dr fauzia Naseem shad
संत की महिमा
Buddha Prakash
कौन था वो ?...
मनोज कर्ण
समय ।
Kanchan sarda Malu
'परिवर्तन'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
✍️बदल गए है ✍️
Vaishnavi Gupta
पापा करते हो प्यार इतना ।
Buddha Prakash
पिता की व्यथा
मनोज कर्ण
रबीन्द्रनाथ टैगोर पर तीन मुक्तक
Anamika Singh
मोहब्बत की दर्द- ए- दास्ताँ
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
समय को भी तलाश है ।
Abhishek Pandey Abhi
पिता
Meenakshi Nagar
यादों की बारिश का कोई
Dr fauzia Naseem shad
सपनों में खोए अपने
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
अच्छा आहार, अच्छा स्वास्थ्य
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
Loading...