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29 Nov 2022 · 1 min read

🦋🦋दिल में बसाते हैं, पर एतबार नहीं करते🦋🦋

##क्यों री बौनी कभी कविता लिख कर दिखा कभी##
##इतनी पढ़ाई पर तो काव्य का अंकुर फूट जाता है##
##मूर्ख##
##तेरी पीएचडी बेकार है,बौनी##
##अब बच्चे खिलाना##
##मणिकर्णिका##
##हमारी कलम कभी सूखेगी नही##
##तेरा अन्त होगा##
##मनाली घूमने जा रही होगी,क्यों री बौनी, बौना##

दिल में बसाते हैं,पर एतबार नहीं करते।
दिल में बसाते हैं,पर एतबार नहीं करते।।
उन्हें देखें नहीं तो नज़रे क्या करें,
धड़के नहीं तो ये दिल क्या करे,
बस बची है अब ये खामोशियाँ,
ज़माने भर का शोर क्या करे,
रुके हैं दिल के मकाँ में, इन्तजार नहीं करते,
दिल में बसाते हैं पर एतबार नहीं करते।।1।।
वो गलियाँ जिन्हें हम तलाशते रहे,
उनकी यादों को हम सम्भालते रहे,
ख़ुसूसियत उनमें क्या-क्या न थी,
हर इक को निगाह में ढालते रहे,
कहते हैं, पर बरबाद नहीं करते,
दिल में बसाते हैं, पर एतबार नहीं करते।।2।।
उनके संग से जिन्दगी महकी फूल जैसी,
रोशनी आई जिन्दगी में,चाँदनी जैसी,
कोई पतझड़ कहता कोई शबनम की बूँदे,
मैं तो कहूँगा, सूरज की रोशनी जैसी,
इक बार मुस्कुराकर, हर बार नहीं करते,
दिल में बसाते हैं, पर एतबार नहीं करते।।3।।
कितना ढलान है उनके इश्क़ में,
मेरा इश्क़ भी उतरे इसके जरिये,
मैं दफ़न कर भी दूँ इस दीवानगी को,
वे जिन्दगी दे देंगें जरूर, अपनी वफ़ा के जरिए,
इश्क़ करते हैं, पर इज़हार नहीं करते,
दिल में बसाते हैं,पर एतबार नहीं करते।।4।।

ख़ुसूसियत=विशेषता

©®अभिषेक: पाराशरः

Language: Hindi
Tag: गीत
49 Views
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