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21 Oct 2022 · 1 min read

🪔🪔दीपमालिका सजाओ तुम।

🪔🪔
दीपमालिका सजाओ तुम।
स्वयं ज्ञान-आलोक बनो,सबको नहलाओ तुम।

🧿
दिव्य-शांतिमय प्रेम-प्रदर्शक की वाणी में फलित अहिंसा।
किंतु कृत्यमय वाह्य-आचरण से परिलक्षित होती हिंसा।
दुहरा चिंतन तजो, हृदय को अब चमकाओ तुम।
दीपमालिका सजाओ तुम।

🧿
जब रावण प्रतिवर्ष मरे फिर अहं पाल त्यागी क्यों ममता।
आतंकी के फंदे में ,फंस रही प्रीतिमय दिव्य सु समता।
काले मन की कलुषित चालें,मत सहलाओ़ तुम।
दीपमालिका सजाओ तुम।

🧿
दीप-ज्योति के पुण्य पर्व पर राम आतमा की हो सत्ता।
ज्ञान-प्रेममधु से पोषित कर लो मनमय मधुमक्खी छत्ता।
दिव्यालोक स्वयं के अंदर और बढ़ाओ तुम।
दीपमालिका सजाओ तुम।
……………….
पं बृजेश कुमार नायक
🙏🙏

🌹मेरी कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के द्वितीय स़स्करण से ली गयी रचना।
पृष्ठ संख्या ४७ से।

🌹”जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति का द्वितीय संस्करण साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से प्रकाशित है और अमेजन-फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

🌹आपको सपरिवार “पंच दिवसीय पावन पर्व दीपावली” (धनतेरस,नरक चतुर्दशी, दीपावली ,गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज) की अनंत हार्दिक शुभकामनाएं।
……………………………………………

पं बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी
विद्यावाचस्पति
विद्यासागर
🙏🙏

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Language: Hindi
Tag: कविता
2 Likes · 1 Comment · 621 Views

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