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🙏माॅं सिद्धिदात्री🙏

मॉं सिद्धिदात्री
…….🙏……

हे जगदम्बे , ‘नवदुर्गा’ की नौवीं रूप;
‘भक्तों’ को भाये, तेरा ‘सिद्धिस्वरूप’
‘माता’ तू ही , जग की ‘अधिष्ठात्री’ है;
हर ‘सिद्धि की देवी’, “सिद्धिदात्री” है;
तू ही ‘मां’, ‘सर्वशास्त्रमयी’, ‘चतुर्भुजा’
तू, ‘पद्मवासिनी’, ‘श्वेतवस्त्रधारिणी’ है;
विद्या दो हे ‘माता’, ‘सरस्वतिस्वरूपा’;
तू, ‘शंख’,’चक्र’ ‘गदाधारी’, ‘विश्वरूपा’
तू तो , अपने भक्तों को सदा प्यारी है;
‘सिंह’ , अपने जगमाता की सवारी है;
हे ‘मां’, तू ही ‘साध्वी’ , तू ‘सावित्री’ है;
तू ही, ‘शिवदूती’, ‘परमेश्वरी”आर्या’ है;
तुम तो,’महेश्वर”महादेव’ की ‘भार्या’ है;
तेरी कृपा से ही शिव भी, सिद्धि पाए;
फिर आधा स्वरूप, ‘देवी’ सा करवाए;
तब तो महादेव,अर्द्धनारीश्वर कहलाए;
तू ही , ‘जगमाता’, ‘दुर्गा’ व ‘पार्वती’ है;
हरेक ‘सिद्धि’ , ‘मां’ तुमसे ही आती है;
‘अणिमा’ , ‘महिमा’, ‘गरिमा’, ‘लघिमा’
‘प्रकाम्य’ ‘ईशित्व’ ‘वाशित्व’ व प्राप्ति;
इन आठों सिद्धि की , तू ही है ‘शक्ति’;
यह तेरी आराधना से ही संभव है, मां;
पाये सब , ‘रिद्धि’ ‘सिद्धि’ और ‘मुक्ति’;
चाहे; देव, दानव,’किन्नर’ हो या ‘ऋषि’
सब करे ‘माता’ , तेरी ही सदा ‘स्तुति’;
हे मां तु, ‘सर्वदेवस्तुता’, ‘वैष्णवीमाता’;
तू ही हो ‘अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता’;
तेरी आराधना से ही, हे ‘ब्राह्मणीमाता’;
हर कोई , अच्छा तन व मन को पाता;
तेरी भक्ति से ही ; यश,धन,बल आता;
तू ही तो मां , सबका है भाग्य विधाता;
हे माता , आज हर भक्त-जन तेरे द्वारे;
”जय माता दी”, “जय माता दी” गाता।
**************🙏*************

स्वरचित सह मौलिक;
…..✍️ पंकज ‘कर्ण’
………….कटिहार।।
तिथि:१४/१०/२९२१

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