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23 Dec 2022 · 1 min read

😊 बस एक पंच (Punch)

#काव्यात्मक_व्यंग्य
■ प्रपंच नहीं, बस एक पंच
【प्रणय प्रभात】
“ कामयावी के लिए,
सार्वजनिक क्षेत्र में आओ।
श्वान और श्रगाल की तरह गर्दन ऊपर उठाओ।
एक सुर में अलापो,
आसमान की तरफ देखो
और पूरा दम लगा कर
सूरज की ओर थूको।
वापस मुँह पर आ गिरेगा,
तुम्हारा अपना थूक।
अगर नहीं हुई निशाना साधने में कोई चूक।
ना कोई मेहनत,
ना कोई खर्चा।
चारों ओर होगा बस,
तुम्हारा ही तुम्हारा चर्चा।
देखते ही देखते छा जाओगे,
सुर्खियों में आ जाओगे।
फ़ोकट का ये उपाय
बस तुम्हारे लिए, क्योंकि,
“ढंग का कोई काम” और
“ईमानदारी के बूते नाम” कर पाना
मुश्किल होता है।
जबकि तुम रातों-रात
सुर्खी में आना चाहते हो।
बस इसीलिए बताया फंडा,
जिसमे बिना मुर्गी होगा अंडा।
तो पहुँचो लाभ पर
और लग जाओ काम पर।
हर विवाद और फसाद का
आजकल बहुत ऊंचा भाव है।
अगले साल चुनाव है।।
👍👍👍👍👍👍👍👍👍

Language: Hindi
1 Like · 50 Views
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