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8 Mar 2023 · 1 min read

😊#लघु_व्यंग्य

😊#लघु_व्यंग्य
■ फिर क्या हुआ अरबों-खरबों का…..?
★ इस बार ठोक देना एक सवाल
【प्रणय प्रभात】
जब कभी कोई भी छोटा, बड़ा या मंझोला स्वयंभू दानवीर आप से कहे (जो कहे बिना मानेगा नहीं) कि- “हमने आपको रोटी दी, पानी दिया, सड़कें दीं, बस-ट्रेन और हवाई-जहाज दिए, स्कूल-कॉलेज और अस्पताल दिए, पुल-पुलिया, खरंजे, फ्लाय-ओवर, स्टेडियम, पार्क, एयरपोर्ट, जंक्शन जैसे तमाम साधन-संसाधन और रोज़गार के अवसर दिए और अब आपको और अधिक अधिकार देना चाहते हैं…।” तो एक प्रश्र तत्काल ठोकने का साहस इस बार ज़रूर करना कि- “जब सब कुछ आपने और आपके बाप-दादाओं ने किया (दिया) है तो फिर उन अरबों-खरबों रुपयों का क्या हुआ, जो सालों से हम और हमारे बाप-दादा टैक्स के रूप में जमा कराते आ रहे हैं..
यह पोस्ट गटर पर ढक्कन और मुंह पर डायपर लगाओ अभियान के तहत जनहित और स्वाभिमान में जारी है। बुरा न मावनो हॉकी है। ऐसे ने एक नारा भी लगाना भी बनता है
“माना अमृत-काल है।
मगर चुनावी साल है।।”

■ प्रणय प्रभात ■
श्योपुर (मध्यप्रदेश)

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