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💐💐सत्संगस्य महत्वम्💐💐

एका महान् त्रुटि:भवति यदा वयं यत्र जनां स्व मन्यते।यत्र वस्तूनां स्व मन्यते।यथा लघुसमयस्य कृते सत्संग: मिलति।एतादृशः लक्ष चतुरशीति योनिषु पतन् जीवान् लघुसमयस्य कृते मनुष्यस्य शरीर: मिलति।एतस्मिन् लघुसमये अपि बहु दीर्घ: कार्यं भवितुं शक्नोति।

©®अभिषेक:पाराशर

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