Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

💐💐प्रेम की राह पर-21💐💐

25-मेरे मन्तव्य का भान न हो सका तुम्हें।क्या तुम्हारे अंतःकरण के नेत्र अधखुले थे?जिन्होंने यह देखा ही नहीं कि यह व्यक्ति जो तुम्हारे सम्मुख इतना कुछ बता चुका है।असत्य न होगा।इसे तुम्हारी गम्भीरता पर प्रश्नचिन्ह लगता है।समझ नहीं आया कि तुम्हे वाकई क्या कुछ मुझ में झूठ प्रतीत हुआ था।या फिर कोई ऐसी संवेदना कि यह सब कुछ कोई मूर्ख ही कर रहा है।इतनी कर्कश शब्दध्वनि विपरीत लिंगी से कभी भी नहीं सुनी थी।कितना उदासीन बना दिया तुमने मुझे हे मित्र।ऐसी उदासीनता कभी न देखी मैंने अपने निकट और तुमने कभी जिज्ञासा भी न की इसके प्रति।यह तुम्हारा बे-रुखापन मुझे कितना शोषित करता है।यह एक ऐसा खड्ग है कि जो कभी दिखायी नहीं देता पर दिन भर में सहस्त्र बार करता है हृदय पर।हृदय को इतना छिद्रित कर दिया है कि वह तुम्हें अब कोसता है।चलो कोई बात नहीं तुम ऐसे ही ठीक।हे निष्ठुर!थोड़ी तो कोमलता के दर्शन करा देना।उपरि भाग तो तुम्हरा कोमलता से ओतप्रोत है।परं अंतश इतना फौलादी क्यों।क्या अग्निबाण का संधान कर दिया है मेरे ऊपर।हे कोमलाङ्ग तुम्हारे नेत्रों से संधानित हुआ यह अग्निबाण मुझे शनै:-शनै: दाह दे रहा है।भावनाओं का स्फुरण भी ज्वलित हो रहा है।पतंगे जैसा अनुभव कर रहा हूँ आखिर मैं इस दीपशिखा की ओर कैसे चला गया।क्या किसी सम्मोहकता का रूप धरे हुए थे।अब इससे सुरक्षित रहने का उपाय ही परामर्श कर दो।तुमसे अभी तक अपने प्रति भी उस भावना का वर्द्धन न हो सका कि मुझ ग़रीब से बात कर लेते।ऐसी रिक्तता क्यों है।तुम्हें अब सहन करता ही रहना होगा क्या।हाय!क्या तुम इस वियोग के जनक हो।तो क्यों इसे समाप्त नहीं कर देते।मेरे हृदय में कभी अब प्रेमपुष्प नहीं पुष्पित होंगे।हाय!अब मेरे इस जीवन को चन्दन जैसी शीतलता कौन देगा।मैंने तुम्हें चन्दन ही समझा।परं तुम ने मेरे प्रति हुताशन का व्यवहार किया।हे ईश्वर!मेरे इस जलती हुई देह को तुम ही शीतल कर दो।आनन्द की वर्षा कर दो।जिससे विचार की श्रेष्ठता बनी रहे।।करोगे न मुझे सुखी।हृदय में शीतलता का विश्वास भर दो मेरे।हे निष्ठुर,मेरा ईश्वर तुमसे मिलवाएगा तो सही समय पर। उसी समय तुमसे उस शोषक व्यवहार के विषय में प्रश्नोत्तर करूँगा।मेरे जीवन की प्रतिस्पर्धा का अर्द्धांश तुमसे ही होगा।हे निर्दयी मानवी!तुमसे इस कपट भरी निर्दयता की आशा न थी।उस दृष्टि की भी आशा न थी जिससे तुमने मेरे ऊपर ऐसा प्रहार किया और करते चले गए और कर रहे हो। अदृश्य दण्ड से मेरे सहृदय व्यवहार की कटि को तुमने भंजित कर दिया।कहाँ से अब इसकी शिफ़ा मिलेगी।तुम ही बता दो।हे सुन्दर।इतने कटु विनोद की तुमसे आशा न थी।हाय!इस हरे भरे भावनात्मक उपवन को अपने शब्दनखों से तुमने उन्मूलन कर डाला।कहाँ से अब भाषिक कलेवर जन्म लेगा।तुम ही कुछ करो।कैसे गति पकड़ेगा मेरा पवित्र जीवन।तुम्हारी मूर्खता कब शान्त होगी।इतना करने के बाबजूद भी।

©अभिषेक: पाराशरः

93 Views
You may also like:
महंगाई के दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
नींबू की चाह
Ram Krishan Rastogi
गुम होता अस्तित्व भाभी, दामाद, जीजा जी, पुत्र वधू का
Dr Meenu Poonia
शिव शम्भु
Anamika Singh
✍️✍️ठोकर✍️✍️
"अशांत" शेखर
"एक नई सुबह आयेगी"
Ajit Kumar "Karn"
दिल से निकले हुए कुछ मुक्तक
Ram Krishan Rastogi
✍️✍️नींद✍️✍️
"अशांत" शेखर
किस्मत ने जो कुछ दिया,करो उसे स्वीकार
Dr Archana Gupta
साहित्यकारों से
Rakesh Pathak Kathara
इश्क के मारे है।
Taj Mohammad
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मौत ने कुछ बिगाड़ा नहीं
अरशद रसूल /Arshad Rasool
तुम धूप छांव मेरे हिस्से की
Saraswati Bajpai
पथ पर बैठ गए क्यों राही
Anamika Singh
काव्य संग्रह
AJAY PRASAD
कविता में मुहावरे
Ram Krishan Rastogi
नाम
Ranjit Jha
*कलम शतक* :कवि कल्याण कुमार जैन शशि
Ravi Prakash
" tyranny of oppression "
DESH RAJ
तुम्हीं तो हो ,तुम्हीं हो
Dr.sima
सब खुदा हो गये
"अशांत" शेखर
कैलाश मानसरोवर यात्रा (पुस्तक समीक्षा)
Ravi Prakash
बंदर भैया
Buddha Prakash
मेरा पेड़
उमेश बैरवा
बरसात की छतरी
Buddha Prakash
मुंह की लार – सेहत का भंडार
Vikas Sharma'Shivaaya'
करो नहीं किसी का अपमान तुम
gurudeenverma198
पिता ईश्वर का दूसरा रूप है।
Taj Mohammad
बेजुबान
Anamika Singh
Loading...