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6 Nov 2022 · 1 min read

💐💐परेसां न हो हश्र बहुत हसीं होगा💐💐

परेसां न हो हश्र बहुत हसीं होगा,
ख़्यालों के पन्ने जीवन किताबें,
तुमने अभी तक दिया है अँधेरा,
यदि होते उजाला तो देते उजाला,
फाँसले नहीं तंग मजबूरियाँ हैं,
ग़र मिले तो साझा नसीब होगा
परेसां न हो हश्र बहुत हसीं होगा।।1।।
बेगानगी में भी आवारगी है,
क्या मालूम है?यह किसकी बन्दगी है,
कौन कहाँ तक संग संग चलेगा,
यह जानना ही तो जिन्दगी है,
सब हैं अकेले इस सारे जहाँ में,
जब तक दिल के कोई करीब नहीं होगा,
परेसां न हो हश्र बहुत हसीं होगा।।2।।
दरिया भी प्यासा किनारा भी प्यासा,
तुझे छोड़कर न बची कोई आशा,
बेरंग लौटे तुझतक पहुँचकर,
इंसाफ की बात ना की संभलकर,
इस ढहते मकाँ में तेरा नाम होगा,
परेसां न हो हश्र बहुत हसीं होगा।।3।।
तेरा मचलना मेरा सम्भलना,
सुलझते हुए काश बढ़ते चलें,
एक डोर तुम भी थामे रहो,
एक डोर मैं भी थामे रहा,
कैसा,कहीं क्या?सवाल होगा,
परेसां न हो हश्र बहुत हसीं होगा।।4।।

©®अभिषेक पाराशर

Language: Hindi
Tag: गीत
37 Views
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