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1 Jan 2023 · 1 min read

💐स्वभावस्य भगवतः बंधनं भवति💐

एषः प्रचलनं यत् यदा मनुष्यं स्व स्वामी भवति।तदा सः स्व स्वामिनं विस्मृत: करोति।सत्संगेन यः लाभः भवति।सः सर्व परमात्मना एव आगच्छति।सत्संगस्य अवसरः अपि भगवान् स्वकृपया ददाति।शास्त्रे भक्त्या: बहु महिमा।भक्ति: सुगम अपि।’भगवान् स्वास्ति’-इत्थं भगवता सह स्व सम्बन्ध: मनने ‘अन्या: स्व न सन्ति’-एषः मननं आवश्यक: अस्ति।स्वभावस्य भगवतः बंधनं भवति।अन्याभिः वार्ताभि: भगवतः बन्धनं न भवति।स्वभावे सति माता स्वतः श्रेष्ठ: प्रतीतः भवति।
भगवतः प्रतीक्षा च निरन्तर: स्मृति: च बहु शीघ्र भगवतः मेलनं करोति।कीर्तनेन करणेन भगवति प्रेम: भवति।कीर्तने आनन्द-रूपेण प्रकट: भवति।
क्रियया च पदार्थेण च उच्चै: प्रगत्या एव तत्वस्य प्राप्ति: भवति।क्रियायाः च पदार्थस्य च उपयोग: केवलं अन्यस्य कृते कुरुतः।निष्कामभावेन करोतु तु वयं क्रियया च पदार्थेन च उच्चस्तरे गमिष्यन्ति।एषः कर्मयोगः।क्रिया च पदार्थेन च अस्माकं न आसीत् न अस्ति न भविष्यति।एतौ संसारस्य स्त:।एतौ स्वमननं असत्यव्यवहार:।

©®अभिषेक: पाराशरः’आनन्द’

Language: Sanskrit
1 Like · 1 Comment · 55 Views
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