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4 Dec 2022 · 1 min read

💐परिवारे मातु: च भागिन्या: च धर्म:💐

भगिनी: सर्वदा इच्छेयु: यत् सूचिकावत् स्वभाव: निर्माणं कुर्वन्तु कर्तनीवत् न।सूचिका द्वौ एक: करोति परन्तु कर्तरी एकं द्वौ करोति।ते एतदृशाः कापि कार्यं न करोतु, येन क्लेश: भवतु।गृहे प्रेमस्य भाव: करोतु।बालकान् भोजनस्य कृते विषमता न करोतु।स्वश्रू इच्छेत् यत् पुत्री च पुत्रवधू: च यदि विवादः भवतां तु पुत्रवध्वाः पक्ष: आनयति।
निर्धनबालकान् मिष्ठानं वितरणं करोतु तु शोकः च चिन्ता च नक्ष्यत:।गृहस्त्रआश्रमे बहु सावधानतया निवसति।लघु: त्रुटि: अपि बहु हानिकारकं।अन्य के अपि त्रुटि: करोतु तु तं सह्यतु।गृहस्थ: एका पाठशाला,यस्मिन् प्रेमस्य पाठ: पठतु।

©®अभिषेक: पाराशरः

Language: Sanskrit
56 Views
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