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18 Dec 2022 · 1 min read

💐ज्ञेय: सर्वा: वस्तुनि नाशवान्💐

ज्ञेय: सर्वा: वस्तुनि नाशवान्-
देखिअ सुनिअ गुनिअ मन माहीं,मोह मूल परमारथु नाहीं।।
यत्र वयं लक्ष्य: भविष्यामः तत्र वयं गमिष्यामः।सांसारिक: पारमार्थिक: वा-क्रिये द्वे जडाय एव भविष्यति।परं लक्ष्य: चेतनं भवेयु:।परमात्मनः कृते अकुर्वत् जड़कार्यं अपि चेतनस्य प्राप्ति: कारणं भवति।
सुखदुःखे समे कृत्वा—————-
युद्धरूपी’इत्या क्रियया अपि पापं न स्थानं ग्रहणं करोति।यतः जय:-पराजय: लाभ:-हानि सुख-दु:ख:च वयं लक्ष्य न।लक्ष्य: परमात्मनः तु युद्धरूपी क्रिया’इति अपि परमात्माप्राप्ति: कारणं भविष्यति।लक्ष्य: चेतने सति जड़: अपि चिन्मयं भविष्यति।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Sanskrit
38 Views
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