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21 Oct 2022 · 1 min read

🍀🌺मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा🌺🍀

मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा।
मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा।
दिन ढले याद फिर तुम्हारी आई,
शायद तुम में भी याद बसती होगी,
सितारों में खोज रहा था तुम्हें,
तुम्हारी उनमें आब नज़र आई,
मैंने हर जगह फ़िक्र किया है तुम्हारा।
मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा।।1।।
बे-पर्दा होना सलीके से,
भूल जाना सभी सितम के तरीके,
मैं बहुत खुश हूँ वज़ह तुम हो,
बस यह सोचना हुआ आँख भर आई,
मैंने हर जगह सब्र किया है तुम्हारा।
मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा।।2।।
मेरी फ़ितरत में कुछ गलत नहीं है,
सब साफ है तुम्हारे चेहरे जैसा,
मेरा दिल साफ़ है, हाँ साफ है, इकदम,
तंज दूँ, तो न है, तुम्हारे काजल जैसा,
मैंने हर जगह पाबन्द किया है तुम्हारा।
मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा।।3।।
शुक्रिया कहूँगा, तब जब मिलोगे मुझ से,
बनाये रखे इश्क़ की संजीदगी के लिए,
मैं तो नींद में रहता हूँ तुम्हारी,
नशा छाया ही रहता है तुम्हारा,
मैंने हर जगह इक़रार किया है तुम्हारा।
मैंने हर जगह ज़िक्र किया है तुम्हारा।।4।।

©®अभिषेक पाराशर

##कोई नहीं है टक्कर में,
कहाँ फँसे हो चक्कर में##

Language: Hindi
Tag: गीत
47 Views
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