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25 Dec 2022 · 1 min read

🌺🌻सत्संगेन अंतःकरणं शुद्ध: भवति 🌻🌺

सत्संगेन अंतःकरणं शुद्ध: भवति स्वभावः सुष्ठु भवति।शास्त्रस्य अध्ययनेन मनुष्यं बहूनां वार्तानां ज्ञास्यन्ति।परं स्वभाव: न परिवर्तनं भवति।स्वभाव: परिवर्तनं भविष्यति।परमात्मनः प्राप्तयाः उद्देश्यस्य कृते।रावण: बहु विद्वान आसीत्। बहूनां विद्यानां ज्ञाताः।परं एतस्य स्वभाव: राक्षसवत्।वेदेषु भाष्य लिखित्वा अपि तस्य स्वभावः परिवर्तनं न अभवत्।कारणं यत् एतस्य उद्देश्य: भोगः च संग्रह: च आसीत्।परमात्माप्राप्ति: न।यथा स्वभाव: भवति तथा एव कार्यं करणस्य प्रेरणा प्राप्त: भवति।
सत्संगेन सत् शास्त्रेन सत् विचारेण च बहु लाभ: भवति।अहं सत्संगं महत्वपूर्णं मन्ये।सत्सगेन लाभ: भवति।शास्त्रेषु संतववाणीत्वस्य च नामजप: च बहु महिमा।द्वयोः सत्संगेन बहु लाभ भवति।पुस्तकानां पठनेन इत्थं बोधः न भवति ।परं सत्संगेन परं लाभ: भवति।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Sanskrit
53 Views
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