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23 Dec 2022 · 1 min read

🌺🌺मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें🌺🌺

##मणिकर्णिका##
##प्रिया प्रीतम##
##ईश्वर के लिए समर्पित##
##तुम्हारी मूर्खता को धिक्कार है,बौनी##
##कोई कैसा भी मानवीय व्यवहार नहीं##

मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें,
मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें,
तमन्ना रहे कि वो मुस्कुराते दिखें,
वो मेरे दिल में आते जाते दिखें,
उनकी ज़ीनत को बस महसूस किया है,
उनसे कहूँ कभी वो सरेआम दिखें,
उन्हें उल्फ़त ही समझकर, देखा तुम्हें,
मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें।।1।।
कोई रुकावट नहीं है नजरों का खेल है,
कोई शक़ नहीं है वादों का खेल है,
मेरी देह है पर साया उनका है,
मेरे क़ल्ब और उनकी नज़ाकत का खेल है,
कितने सादा हैं मेरे रहनुमा हैं, देखा तुम्हें,
मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें।।2।।
कभी नाराज़ सूरत उनकी देखी ही नहीं,
इश्क़ की हद क्या हो,खीचीं ही नहीं,
मैंने कहा उनसे मुझे लबालब कर दो,
उन्होंने कहा छलकने की अदा सीखी ही नहीं,
उनकी नसीहत ही मेरा नाज़ है, देखा तुम्हें,
मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें।।3।।
क्या अन्दाज है उनका, बहकते हैं हम,
रोते हैं, सिसकते हुए सोते हैं हम,
तकल्लुफ़ नहीं है हमे वो भी समझते हैं,
उनकी याद की ख़ातिर गिरवी किए हैं हम,
‘हे मेरे नसीब’ कहा फिर देखा तुम्हें,
मैंने छिपकर कई बार देखा तुम्हें।।4।।
ज़ीनत-सजावट, सुंदरता
क़ल्ब-मन,हृदय की बात
नज़ाकत-सम्मान देना
©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
Tag: गीत
44 Views
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