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26 Oct 2022 · 1 min read

🌺🌤️जिन्दगी उगता हुआ सूरज है🌤️🌺

जिन्दगी उगता हुआ सूरज है,
जिन्दगी उगता हुआ सूरज है,
कहो तुम्हें याद न आती होगी,
सजदा किया और दिल बिछाए रखा,
जंजीर हो तुम मेरे लिए,
बस अपनी नज़रों से सलाम करो,
तू ही पश्चिम तू ही पूरब है,
जिन्दगी उगता हुआ सूरज है।।1।।
आँखे भी भूल गई आँसुओं की भाषा,
हाथों की लकीरें भी अब बदल गईं,
मैं तुम्हें अपना सहारा फिर कहा,
अकेलेपन मैं टूट जाना फिर सहा,
भोली लगी,पर न भोली सूरत है,
जिन्दगी उगता हुआ सूरज है।।2।।
सख़्त सजा दो तुम अपनी ज़ानिब,
पलकों से हवा दो तो अपनी ज़ानिब,
मैं परिन्दा बनना चाहता हूँ,
ग़र तुम अपने ख़्वाबों के पंख दो,
मैंने कहा तू मेरी ही मूरत है,
जिन्दगी उगता हुआ सूरज है।।3।।
कसम खाना तुम्हारे इरादे हैं,
टूटी रस्में टूटे वादे हैं,
गुनगुनाना गीत मेरे,अपने संगीत के संग,
तब ही मिलेंगे मुझे राहत के रंग,
जिन्दगी से भी वे बहुत ख़ूबसूरत हैं,
जिन्दगी उगता हुआ सूरज है।।4।।
©®अभिषेक पाराशर
हे रूपा!कहीं तुम्हें काल्पनिक न कहना पड़े।
कोई आवाज़ न आई,तो भूल जाना न पड़े।।

Language: Hindi
Tag: गीत
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