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22 Dec 2022 · 1 min read

🌹🌹वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं, निकालूँ कैसे🌹🌹

##मणिकर्णिका##
##प्रिया प्रीतम##
##बौनी=अनहोनी##

✴️यह गीत अचानक प्रकट हो गया, दैनिक लेखन वाली नोटबुक मिली नहीं, थोड़ा स्मरण करने पर ही लिखा गया।✴️

वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं, निकालूँ कैसे,
वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं, निकालूँ कैसे,
घूमना है उनका मेरे ख़्यालों में,
मेरे उनके सवालों में,जबाबों में,
मसाफ़त के लिए कोई जिम्मेदार नहीं,
उन्हें खोज लेता हूँ हजारों में,
मेरी हर चीज़ पर उनका पहरा है,सम्भालूँ कैसे,
वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं, निकालूँ कैसे।।1।।
उनसे नजदीकियाँ हैं हर इक राह पर,
उनको एतबार है जैसे मुझे मेरी छाँव पर,
कभी वो अपने फ़िक्र से अलग नहीं करते,
बिठा लेते हैं ख़ुद से इश्क़ की नाव पर,
वो रूठते ही नहीं तो मनाऊँ कैसे,
वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं, निकालूँ कैसे।।2।।
न कोई मिसाल न कोई बानगी चाहते हैं,
उन्होंने कहा हम आपको सरेआम चाहते हैं,
न नाज़ है न वादा और न कोई कसूर,
बिना बात के इक दूसरे को सम्भालते हैं,
वो मुझमें समाए हैं मैं उनमें समाऊँ कैसे,
वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं, निकालूँ कैसे।।3।।
मैंने हमेशा चाहा कि बने रहो बने रहो,
शायद मैं भी उनसे ही बना हुआ तो बने रहो,
मालूम पड़ा ग़र छोड़ गए क्या हश्र हो?
अपने दिल पर हाथ फेरा कहा बने रहो,
उनके अलावा किसी का शज़र लगाऊँ कैसे,
वो मेरे दिल के मुसाफ़िर हैं,निकालूँ कैसे।।4।।

मसाफ़त-थकान, समय का अन्तराल

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द

Language: Hindi
Tag: गीत
50 Views
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