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14 Dec 2022 · 1 min read

🌴🌴कभी सुनना मुझे हवाओं से🌴🌴

##मणिकर्णिका##
##तुम्हारे हिस्से में दुःख और डर दोनों हैं##
##बौनी,छोडूँगा नहीं##

कभी सुनना मुझे हवाओं से,
कभी सुनना मुझे हवाओं से,
अँधेरी रातों के साझे सफ़र में,
तुम्हें ख़बर करके बे-ख़बर था मैं,
कोई साज न छेड़ा तेरे बिन,
सभी ख़्वाब रोते हैं अब अधर में,
वह रंगत न आएगी फिजाओं से,
कभी सुनना मुझे हवाओं से।।1।।
इशारे भेजे गये हैं संग में,
वो रंगे हैं तेरे मेरे इश्क़ के रंग में,
समझकर कोई इशारा देना,
जो रंगा हो केवल तेरे ही ढंग में,
गुलामी का दर्द पूछो कभी रिहाओं से,
कभी सुनना मुझे हवाओं से।।2।।
अन्धेरे से पूछो कभी रोशनी की बातें,
ख़्यालों में की थीं तुमसे जो मुलाकातें,
रपटे न थे तेरे चिकनेपन में,
जाने कैसी कटी हैं काली रातें,
घिरते चले गए उनकी हर अदाओं से,
कभी सुनना मुझे हवाओं से।।3।।
कोई रहनुमा बनेगा क्यों?किससे कहें,
उनके दिल में मैं रहूँ, वो मेरे दिल में,
सब्र तो है पर वीरानियाँ हैं संग,
इसे वो भी सहें हम भी सहें,
हमारा पता पूछो उन सदाओं से,
कभी सुनना मुझे हवाओं से।।4।।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
Tag: गीत
38 Views
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