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【19】 मधुमक्खी

सुबह हुई जब निकला सूरज, किरणें फैली धरती पर
दूर हुआ अंधकार धरा का, सबके मन का मिट गया डर
सुबह हुई जब…………
{1} अपने छत्ते से मधुमक्खी, निकल पड़ी है अपनी डगर
इधर उधर वह फूल तरासे, वही घूमते कुछ मधुकर
फूल खिले हैं ताजे – ताजे, मधुरानी बैठे उन पर
पुष्पों का मधु ले निज मुख में, लेकर चली वह अपने घर
सुबह हुई जब………..
{2} मधुरानी प्रसन्न हुई, मधु को मधु कोषों में भर कर
मीठा अमृत जैसा मधुरस, सबको ही होता हितकर
नाना प्रकार की औषधियाँ, बनती हैं मधुरस से जमकर
घातक रोग भी ठीक करे, मधुकर होता बीमारी हर
सुबह हुई जब………..
{3} मेरी विनती मानव से, ना ढा़ओ कहर मधुमक्खी पर
मधुमक्खी जो उजड़ी, उजड़ेंगे तेरे मेरे भी घर
घर से बेघर करो ना उसको, क्यों बनते हो तुम बर्बर
भला करे वह सब जग का, क्यों लगता है हमको भले से डर
सुबह हुई जब………..
सीखः- हमें प्रकृति के किसी जीव के साथ बुरा आचरण नहीं करना चाहिए।
Arise DGRJ { Khaimsingh Saini }
M.A, B.Ed from University of Rajasthan
Mob. – 9266034599

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