Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Aug 6, 2022 · 2 min read

✍️ये रीतियाँ ✍️

समाज के हज़ार बंधनों ने यु जकड़ रखा है,
बढ़ नहीं पा रहे कदम युं पकड़ रखा है,
ये बंधन ये रिवाज़ बड़े ही अजीब है,
जो सच्चे है दिल के सिर्फ उन्हें ही नसीब है,
न जाने कितने दिल टूट जाते है,
न जाने कितने सपने बिखर जाते है,
बसने से पहले कितने घर उजड़ जाते है,
न जाने कितनी आँखों से अपने उतर जाते है,
गलत है रिवाज़ गलत है रीतियाँ ये नहीं कहूंगी,
कहने की एक मर्यादा है उसमे ही रहूंगी,
मानो वो रिवाज़ जो किसी का दिल न दुखाये,
बचाकर रखो इंसानियत बस इतना ही कहूंगी,
बताती हूँ एक छोटी सी बात,
समझने की कोशिश करना,
हमने बनाई नफ़रत की दीवार और बनाते चले गए,
ऊँची नीची जात बताकर इंसानियत को गिराते चले गए,
देखो ज़रा उन दो दिलों की तरफ़ जो एक होना चाहते है,
समाज का अंतर मिटाकर जो अपनापन चाहते है,
कहना बहुत कुछ चाहती हुं उनकी खुशियों, सपने, उलझनें, फैसले, दर्द और तकलीफों के बारे मे,
पर कुछ नही कहूंगी,
इतना कुछ कहने से क्या होगा,
सुनने वाला हर शक़्श जानता है,
उनकी मोहब्बत का अंजाम क्या होगा,
किसी को मान चाहिए, किसी को सम्मान चाहिए,
किसी को रिश्तों में भी अपना अभिमान चाहिए,
कोई चाहता है कि रिश्ते समाज के अनुसार हो,
तो किसी को अपने बराबर का खानदान चाहिए,
टूट कर बिखर जाने वाले ये सपने है हमारे,
पर क्या करे लड़ नही पायेंगे सब अपने है हमारे,
मिलेंगे दर्द हज़ार हर दर्द को सहना है,
मानो अपनो की बात गर उनके दिल मे रहना है,
हर बार की तरह इस बार भी टूट जायेगा दिल बिखर जायेंगी खुशिया,
इस दिल की लाचारी पर हँसती नज़र आयेंगी ये रीतियाँ,
अंत में सिर्फ इतना ही कहूंगी,
किस्मत रूठ गयी हर दीवाने की,
हार गया दिल जीत हुई ज़माने की।

✍️वैष्णवी गुप्ता
कौशांबी

4 Likes · 4 Comments · 40 Views
You may also like:
आप कौन है
Sandeep Albela
जातिगत जनगणना से कौन डर रहा है ?
Deepak Kohli
इज्जत
Rj Anand Prajapati
दर्द से खुद को
Dr fauzia Naseem shad
लिट्टी छोला
आकाश महेशपुरी
भारतीय संस्कृति के सेतु आदि शंकराचार्य
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
'बेटियाॅं! किस दुनिया से आती हैं'
Rashmi Sanjay
मां सरस्वती
AMRESH KUMAR VERMA
पेश आना अब अदब से।
Taj Mohammad
💐अस्माकं प्रापणीयं तत्व: .....….....💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हादसा
श्याम सिंह बिष्ट
मुकद्दर ने
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
Father's Compassion
Buddha Prakash
मंजिल की उड़ान पुस्तक
AMRESH KUMAR VERMA
गुलफाम बन गए हैं।
Taj Mohammad
वसंत
AMRESH KUMAR VERMA
पुस्तक समीक्षा -'जन्मदिन'
Rashmi Sanjay
प्रेम की किताब
DESH RAJ
हमनें ख़ामोश
Dr fauzia Naseem shad
इच्छाओं का घर
Anamika Singh
सेमर
विकास वशिष्ठ *विक्की
जून की दोपहर (कविता)
Kanchan Khanna
“ कुछ दिन शरणार्थियों के साथ ”
DrLakshman Jha Parimal
एक कतरा मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
*श्री विष्णु शरण अग्रवाल सर्राफ द्वारा ध्यान का आयोजन*
Ravi Prakash
*बाबा तीजो है (बाल कविता)*
Ravi Prakash
मुखौटा
संदीप सागर (चिराग)
मरने के बाद।
Taj Mohammad
खुद को कभी न बदले
Dr fauzia Naseem shad
दुनिया की फ़ितरत
Anamika Singh
Loading...