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22 Jun 2022 · 1 min read

✍️पैरो तले ज़मी✍️

✍️पैरो तले ज़मी✍️
………………………………..//
वो जब बहोत पास थी
कोई बची ना आस थी

वो जब दूर चली गयी…
कोई बची ना सांस थी

सारे मौसम हमें रास थे,
वो जान-ए-बहार खास थी

बेमौसम उस पतझड़ में..
गुलाब की ख़ुश्बू उदास थी

वो ख़ुश्बू थी हवाँ में उडी
बस पैरो तले ज़मी साथ थी
………………………………..//
✍️”अशांत”शेखर✍️
22/06/2022

2 Likes · 4 Comments · 97 Views
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