Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Jul 2022 · 2 min read

✍️कृपया पुरुस्कार डाक से भिजवा दो!✍️

साहिब-दिल्ही आने तक के पैसे नही है कृपया पुरुस्कार डाक से भिजवा दो!

हलधर नाग – जिसके नाम के आगे कभी श्री नही लगाया गया, 3 जोड़ी कपड़े ,एक टूटी रबड़ की चप्पल एक बिन कमानी का चश्मा और जमा पूंजी 732 रुपया का मालिक आज पद्मश्री से उद्घोषित होता है ।।

ये हैं ओड़िशा के हलधर नाग ।
जो कोसली भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। ख़ास बात यह है कि उन्होंने जो भी कविताएं और 20 महाकाव्य अभी तक लिखे हैं, वे उन्हें ज़ुबानी याद हैं। अब संभलपुर विश्वविद्यालय में उनके लेखन के एक संकलन ‘हलधर ग्रन्थावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। सादा लिबास, सफेद धोती, गमछा और बनियान पहने, नाग नंगे पैर ही रहते हैं। ऐसे हीरे को चैनलवालों ने नहीं, मोदी सरकार ने पद्मश्री के लिए खोज के निकाला । उड़‍िया लोक-कवि हलधर नाग के बारे में जब आप जानेंगे तो प्रेरणा से ओतप्रोत हो जायेंगे। हलधर एक गरीब दलित परिवार से आते हैं।10 साल की आयु में मां बाप के देहांत के बाद उन्‍होंने तीसरी कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। अनाथ की जिंदगी जीते हुये ढाबा में जूठे बर्तन साफ कर कई साल गुजारे। बाद में एक स्कूल में रसोई की देखरेख का काम मिला। कुछ वर्षों बाद बैंक से 1000रु कर्ज लेकर पेन-पेंसिल आदि की छोटी सी दुकान उसी स्कूल के सामने खोल ली जिसमें वे छुट्टी के समय पार्टटाईम बैठ जाते थे। यह तो थी उनकी अर्थ व्यवस्था। अब आते हैं उनकी साहित्यिक विशेषता पर। हलधर ने 1995 के आसपास स्थानीय उडिया भाषा में ”राम-शबरी ” जैसे कुछ धार्मिक प्रसंगों पर लिख लिख कर लोगों को सुनाना शुरू किया। भावनाओं से पूर्ण कवितायें लिख जबरन लोगों के बीच प्रस्तुत करते करते वो इतने लोकप्रिय हो गये कि इस साल राष्ट्रपति ने उन्हें साहित्य के लिये पद्मश्री प्रदान किया। इतना ही नहीं 5 शोधार्थी अब उनके साहित्य पर PHd कर रहे हैं जबकि स्वयं हलधर तीसरी कक्षा तक पढ़े हैं।

आप किताबो में प्रकृति को चुनते है
पद्मश्री ने, प्रकृति से किताबे चुनी है।।

नमन है ऐसी विभूतियो को जिनका लक्ष्य धन अर्जन नहीं बल्कि ज्ञानार्जन हैं। नागजी ने काव्यों की रचना कर साहित्य जगत को समृद्ध किया।🙏🙏
*फेसबुक से साभार

1 Like · 119 Views
You may also like:
''प्रकृति का गुस्सा कोरोना''
Dr Meenu Poonia
बँटवारे का दर्द
मनोज कर्ण
गाँव की साँझ / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
'दुष्टों का नाश करें' (ओज - रस)
Vishnu Prasad 'panchotiya'
गोरे मुखड़े पर काला चश्मा
श्री रमण 'श्रीपद्'
जीवन की प्रक्रिया में
Dr fauzia Naseem shad
यह सिर्फ़ वर्दी नहीं, मेरी वो दौलत है जो मैंने...
Lohit Tamta
ठोकरों ने समझाया
Anamika Singh
दर्द इनका भी
Dr fauzia Naseem shad
पिता अब बुढाने लगे है
n_upadhye
तू कहता क्यों नहीं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मजबूर ! मजदूर
शेख़ जाफ़र खान
किसी का होके रह जाना
Dr fauzia Naseem shad
हवा का हुक़्म / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
रूठ गई हैं बरखा रानी
Dr Archana Gupta
हमारे बाबू जी (पिता जी)
Ramesh Adheer
मेरे पापा
Anamika Singh
इंतज़ार थमा
Dr fauzia Naseem shad
इज़हार-ए-इश्क 2
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मोहब्बत की दर्द- ए- दास्ताँ
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
तुम ना आए....
डॉ.सीमा अग्रवाल
✍️प्यारी बिटिया ✍️
Vaishnavi Gupta
ज़िंदगी हमको
Dr fauzia Naseem shad
तेरी ज़रूरत बन जाऊं मैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
इस दर्द को यदि भूला दिया, तो शब्द कहाँ से...
Manisha Manjari
मेरे पिता है प्यारे पिता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
बेरूखी
Anamika Singh
गीत
शेख़ जाफ़र खान
✍️रास्ता मंज़िल का✍️
Vaishnavi Gupta
नए-नए हैं गाँधी / (श्रद्धांजलि नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Loading...